इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददातायूपी बोर्ड की किताबें एनसीईआरटी से भी सस्ती होंगी। अप्रैल 2018 से एनसीईआरटी की किताबें लागू करने जा रहे यूपी बोर्ड ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि बोर्ड से संबद्ध तकरीबन 26 हजार स्कूलों के छात्र-छात्रओं को 10 प्रतिशत तक सस्ती किताबें मिलेंगी।पहले चरण में कक्षा 9 से 12 तक की 18 विषयों की किताबें ही लागू होंगी जिसके लिए यूपी बोर्ड और एनसीईआरटी के बीच करार हो चुका है। एनसीईआरटी किताबें छपवाकर फुटकर विक्रेताओं को बेचने के लिए उपलब्ध कराता है जिसके लिए 10 प्रतिशत तक कमीशन देता है। लेकिन बोर्ड प्रकाशकों को सीधे प्रकाशन का अधिकार दे रहा है।इसलिए कमीशन के रूप में 10 प्रतिशत जो फुटकर विक्रेताओं को मिलता था उसका लाभ छात्र-छात्रओं को मिल सकता है। यूपी बोर्ड की किताबें प्रकाशक अपने खर्च पर विषय विशेषज्ञों से किताबें लिखवाते थे क्योंकि बोर्ड सिर्फ पाठ्यक्रम देता था। जबकि इस बार बोर्ड पूरी लिखी हुई किताब सॉफ्टकॉपी में उपलब्ध कराएगा। तीसरी सबसे अहम बात है कि यूपी में छात्रसंख्या अधिक होने के कारण मुनाफा बढ़ेगा जिसके चलते दाम कम होने तय हैं। प्रकाशन का अधिकार उसी को मिलेगा जो सबसे कम कीमत में उपलब्ध कराएगा। सचिव नीना श्रीवास्तव का कहना है कि कम से कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण किताबें उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
Saturday, 9 December 2017
up board ; एनसीईआरटी से भी सस्ती होंगी यूपी बोर्ड की किताबें
इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददातायूपी बोर्ड की किताबें एनसीईआरटी से भी सस्ती होंगी। अप्रैल 2018 से एनसीईआरटी की किताबें लागू करने जा रहे यूपी बोर्ड ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि बोर्ड से संबद्ध तकरीबन 26 हजार स्कूलों के छात्र-छात्रओं को 10 प्रतिशत तक सस्ती किताबें मिलेंगी।पहले चरण में कक्षा 9 से 12 तक की 18 विषयों की किताबें ही लागू होंगी जिसके लिए यूपी बोर्ड और एनसीईआरटी के बीच करार हो चुका है। एनसीईआरटी किताबें छपवाकर फुटकर विक्रेताओं को बेचने के लिए उपलब्ध कराता है जिसके लिए 10 प्रतिशत तक कमीशन देता है। लेकिन बोर्ड प्रकाशकों को सीधे प्रकाशन का अधिकार दे रहा है।इसलिए कमीशन के रूप में 10 प्रतिशत जो फुटकर विक्रेताओं को मिलता था उसका लाभ छात्र-छात्रओं को मिल सकता है। यूपी बोर्ड की किताबें प्रकाशक अपने खर्च पर विषय विशेषज्ञों से किताबें लिखवाते थे क्योंकि बोर्ड सिर्फ पाठ्यक्रम देता था। जबकि इस बार बोर्ड पूरी लिखी हुई किताब सॉफ्टकॉपी में उपलब्ध कराएगा। तीसरी सबसे अहम बात है कि यूपी में छात्रसंख्या अधिक होने के कारण मुनाफा बढ़ेगा जिसके चलते दाम कम होने तय हैं। प्रकाशन का अधिकार उसी को मिलेगा जो सबसे कम कीमत में उपलब्ध कराएगा। सचिव नीना श्रीवास्तव का कहना है कि कम से कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण किताबें उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
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