Saturday, 9 December 2017

साहित्यकार ममता कालिया को व्यास सम्मान, दुक्खम-सुक्खम’ उपन्यास के लिए सत्ताइसवें व्यास सम्मान से

नई दिल्ली एजेंसीहिन्दी की जानी-मानी साहित्यकार ममता कालिया को वर्ष 2017 का प्रतिष्ठित ‘व्यास सम्मान’ देने की घोषणा की गई। के.के. बिरला फाउंडेशन ने शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति में बताया कि साहित्य अकादमी के अध्यक्ष और प्रख्यात साहित्यकार विश्वनाथ तिवारी की अध्यक्षता वाली एक चयन समिति ने ममता को उनके उपन्यास ‘दुक्खम-सुक्खम’ के लिए सत्ताइसवें व्यास सम्मान से नवाजने का निर्णय किया। उनका यह उपन्यास वर्ष 2009 में प्रकाशित हुआ था। विज्ञप्ति में बताया गया है कि ममता को सम्मान के रूप में साढ़े तीन लाख रुपये की राशि दी जाएगी।ममता का जन्म दो नवम्बर, 1940 को वृन्दावन में हुआ था। वह हंिदूी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में लिखती हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। फिर वह मुंबई के एस.एन.डी.टी. विश्वविद्यालय में परास्नातक विभाग में व्याख्याता बन गईं। वर्ष 1973 में वह इलाहाबाद के एक डिग्री कॉलेज में प्राचार्य नियुक्त हुई और वहीं से वर्ष 2001 में अवकाश ग्रहण किया।व्यास सम्मान किसी भारतीय नागरिक की दस वर्ष की अवधि में हिन्दी में प्रकाशित रचना को दिया जाता है। व्यास सम्मान की शुरुआत 1991 में की गई थी। पहला व्यास सम्मान डॉ. राम विलास शर्मा को दिया गया था।
उत्तर प्रदेश हंिदूी संस्थान द्वारा यशपाल कथा सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान,राम मनोहर लोहिया सम्मान, वनमाली सम्मान, वाग्देवी सम्मान ममता की रचनाएंबेघर, नरक-दर-नरक, दुक्खम-सुक्खम, सपनों की होम डिलिवरी, कल्चर वल्चर, जांच अभी जारी है, निर्मोही, बोलने वाली औरत, भविष्य का ी विमर्श इत्यादि।
ममता को अन्य सम्मानउत्तर प्रदेश हंिदूी संस्थान द्वारा यशपाल कथा सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान,राम मनोहर लोहिया सम्मान, वनमाली सम्मान, वाग्देवी सम्मान ममता की रचनाएंबेघर, नरक-दर-नरक, दुक्खम-सुक्खम, सपनों की होम डिलिवरी, कल्चर वल्चर, जांच अभी जारी है, निर्मोही, बोलने वाली औरत, भविष्य का ी विमर्श इत्यादि।




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