योगी सरकार के कड़े निर्देशों के बावजूद लगभग डेढ़ लाख राज्यकर्मियों ने अब तक अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है। सरकार ने ऐसे कार्मिकों को 28 फरवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति का ब्यौरा प्रस्तुत करने का एक और मौका दिया है।
28 फरवरी तक पोर्टल पर पिछले वर्ष 31 दिसंबर तक की चल-अचल संपत्ति न बताने वाले कार्मिकों को मार्च में वेतन नहीं मिलेगा।
सभी कर्मचारियों ने नहीं दिया है ब्यौरा
उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत प्रदेश के सभी श्रेणियों के 8,33,510 राज्यकर्मियों को अपनी चल-अचल संपत्ति का वार्षिक ब्यौरा मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से 15 फरवरी तक देना था। गौर करने की बात यह है कि अब तक 6,89,826 कार्मिकों(कुल कार्मिकों का 83 प्रतिशत) ने ही अपनी संपत्ति का ब्यौरा दिया है। लगभग 17 प्रतिशत यानी 1,43,684 कार्मिकों ने संपत्ति का ब्यौरा अब तक पोर्टल पर नहीं दिया है।
इतनी बड़ी संख्या में कार्मिकों द्वारा संपत्ति न बताने पर असंतोष जताते हुए मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की ओर से सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव से लेकर विभागाध्यक्षों को कार्मिक विभाग के जारी शासनादेश में कहा गया है कि 28 फरवरी तक सभी कार्मिकों को अपनी संपत्ति का ब्यौरा पोर्टल पर प्रस्तुत करने का एक और अवसर देने का निर्णय लिया गया है।
28 फरवरी को संपत्ति ब्यौरा देने का आखिरी मौका
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 28 फरवरी तक अपनी संपत्ति का ब्यौरा पोर्टल पर प्रस्तुत करने वाले कार्मिकों को ही मार्च में वेतन मिलेगा। विभागों के आहरण-वितरण अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है।
यूपी में आउटसोर्स कर्मियों का बढ़ेगा मानदेय
सनातन संस्कृति की आस्था के केंद्र के रूप में चतुर्दिक आभा बिखेर रहे महाकुंभ से प्रेरणा लेकर योगी सरकार ने 20 फरवरी को विधानमंडल में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 8,08,736.06 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। अपने नौवें बजट में योगी सरकार ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास के जरिये एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का आकार पाने के लक्ष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ाने का हौसला दिखाया है।
वहीं नित्य नूतन होते हुए भी पुरातन की भावना को आत्मसात करने वाली सनातन संस्कृति के अनुरूप वंचितों को वरीयता देकर अंत्योदय के प्रति अपनी पुरानी प्रतिबद्धता दोहराई है।
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