Sunday, 31 January 2021

पेंशन अध्यादेश पर यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

 सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पेंशन अध्यादेश 2020 को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने अध्यादेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग पर भी नोटिस जारी किया है। वर्कचार्ज सेवा से स्थायी हुए 12 कर्मचारियों ने अध्यादेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।


याचिका में अध्यादेश निरस्त करने की मांग भी की गई है। वर्कचार्ज कर्मचारी के तौर पर की गई सेवा को पेंशन के लिए कुल सेवा अवधि में शामिल किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के दो सितंबर, 2019 के फैसले को भी लागू करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि अध्यादेश के बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्प्रभावी हो गया है, क्योंकि अध्यादेश में वर्कचार्ज के तौर पर किए गए काम की अवधि को पेंशन पाने की सेवा अवधि में नहीं शामिल किया गया है।



उप्र सरकार ने पेंशन के लिए क्वालीफाइंग सर्विस के बारे में 21 अक्टूबर, 2020 को नया अध्यादेश जारी किया। इसे उप्र क्वालीफाइंग सर्विस फार पेंशन एंड वैलिडेशन आर्डिनेंस कहा गया है। इस अध्यादेश के बाद से जिन याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर वर्कचार्ज सेवा अवधि को जोड़ कर पेंशन मिलनी शुरू हो गई थी, उनकी पेंशन रुक गई है।



न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर व सूर्यकांत की पीठ ने गत 27 जनवरी को याचिकाकर्ताओं के वकील डीके गर्ग की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया।



इसके पहले डीके गर्ग ने याचिका पर बहस करते हुए कोर्ट से कहा कि नए पेंशन अध्यादेश से उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दो सितंबर, 2019 का फैसला निष्प्रभावी कर दिया है। उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वर्कचार्ज के तौर पर की गई सेवा को पेंशन के लिए जरूरी सेवा वर्षों की गिनती में शामिल किया जाएगा।


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