- यूपी के प्राइमरी स्कूलों के टीचर्स के अंतर्जनपदीय तबादले का मामला
- हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के फैसले पर लगाई मुहर
- हाईकोर्ट का अहम आदेश, एक बार ट्रांसफर पा चुके टीचर्स का दोबारा नहीं हो सकता तबादला
- सामान्य परिस्थितियों में दोबारा नहीं हो सकता ट्रांसफर
- विशेष परिस्थितयों में ही दूसरी बार हो सकता है तबादला
- जस्टिस अजीत कुमार की सिंगल बेंच ने सुनाया फैसला
इसको सही माना गया है
अंतर्जनपदीय स्थानांतरण:
आज माननीय न्यायालय ने बेसिक अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण के विषय में 2 अत्यंत महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
1-- न्यायालय ने शासन की चल रही प्रक्रिया को दोषमुक्त माना और प्रक्रिया के विरुद्ध डाली गई समस्त याचिकाओं को खारिज कर दिया।
*2-- नियमित स्थानान्तरण को परिभाषित करते हुए न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं की मांग को स्वीकार किया और सरकार को आदेशित किया कि दिव्यांग, महिलाओं और एकल माता पिता के आधार पर पात्र अभ्यर्थियों को अवसर की सीमा में बांधना मानवीय और विधिक संवेदनाओं के विरुद्ध होगा।*
*अतः समस्त महिला, दिव्यांग और एकल माता पिता के आधार पर मिलने वाले अनुमन्य लाभ को अभ्यर्थी एक से भी अधिक बार लेने का पूर्ण अधिकारी है।*
निष्कर्ष-- अब पुनः ऐसे अभ्यर्थियों से लिये जाएंगे आवेदन जो पूर्व में उपर्युक्त आधार पर स्थानान्तरण ले चुके हैं या लेने के बाद पुनः इस आधार पर लाभ पाने के पात्र बन चुके हैं।।
*विशेष लाभ उन अभ्यर्थियों को प्राप्त होगा जो महिलाएं पूर्व में ट्रांसफर का लाभ ले चुकी हैं और पुनः आवेदन करेंगी या पहले अविवाहित थीं या जिनके पति की शासकीय सेवा में बाद में नियुक्ति हुई है।*
तो अब 18 अंकों से कम वाले पुरुष अभ्यर्थी दौड़ से लगभग बाहर हो जाएंगे किन्तु वास्तव में पात्र अभ्यर्थियों के लिए न्यायालय ने आदेश दे दिया है।।
हाई कोर्ट इलाहाबाद








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