जागरण संवाददाता, बरेली : एडहाॅक की नौकरी जोड़कर खुद को वरिष्ठ बताने वाले हजारों शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दे दिया है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध डीके कॉलेज, मुरादाबाद की प्राचार्या जौली गर्ग की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीते 13 नवंबर को फैसला दिया था कि वरिष्ठता निर्धारण में एडहॉक सर्विस की गणना नहीं की जा सकती है। इसे प्राचार्या ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। कॉलेज की शिक्षिका डॉ. शोभा ने इसकी जानकारी दी
डॉ. अनुपमा होगी वरिष्ठ, देशभर के लिए नजीर बना फैसला सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से वरिष्ठता के लिए लंबी लड़ाई लड़ने वाली डीजे। कॉलेज की शिक्षिका डॉ. अनुपमा मेहरोत्रा अब कॉलेज में सबसे वरिष्ठ होगी। हालांकि, वह प्राचार्य बन पाएंगी या नहीं इसपर अभी असमंजस बरकरार है।
वहीं इस आदेश के बाद देशभर के कॉलेजों में वरिष्ठता को लेकर चल रहे विवाद पर भी विराम लग गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को नजीर मानकर सभी जगह लागू किया जाएगा।
बरेली कॉलेज की वरिष्ठता सूची भी नए सिरे से बदलेगी
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बरेली कॉलेज में भी लंबे समय से चल रहा
वरिष्ठता का विवाद खत्म हो जाएगा। यहा भी नए सिरे से वरिष्ठता सूची तैयार की जाएगी जिसमें एडहाॅक सर्विस को नहीं जोड़ा जाएगा इसके चलते प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन भी कई पायदान नीचे आजाएंगे। प्राचार्य पद के लिए खुद को पहला दावेदार बताने वाली डॉ.पूर्णिमा अनिल ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अब उन्हें पूरी उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन नियमों को देखते हुए प्राचार्य पद के मेरे अधिकार को दिलाने में मदद करेगा। गणित विभाग के टीएस चौहान ने बताया कि इसी आदेश के तहत ही बरेली कॉलेज में भी वरिष्ठता सूजी का निर्धारण किया जाना चाहिए।

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