उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग (Uttar Pradesh Secondary School) में प्रबंधतंत्र के जरिए भर्ती किए गए शिक्षकों को हटाने का आदेश सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जारी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस आदेश के बाद वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों में गम का माहौल बना हुआ है। अब भविष्य में उनके साथ में क्या होगा, इसके बारे में अभी से कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। माध्यमिक शिक्षा विभाग (Uttar Pradesh Secondary Eduction Depertment) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के इस आदेश ने प्रदेश के हजारों शिक्षकों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का आदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग (Uttar Pradesh Secondary Eduction Depertment) को मिलते ही शिक्षकों की परीक्षा सहित अन्य प्रक्रिया को लेकर कार्रवाई शुरू हो जाएगी। माध्यमिक शिक्षा के सचिव सहित जिले के डीआईओएस (DIOS) भी सरकार के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की तरफ से दिए गए आदेश में सिर्फ माध्यमिक शिक्षा (Uttar Pradesh Secondary Eduction Depertment) से संबंधित स्कूल ही नहीं बल्कि अल्पसंख्यक संस्थाएं भी इसमें शामिल है।
बता दें याची संजय सिंह सहित अन्य लोगों की तरफ से याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के न्यायाधीश संजय किशन कौल और केएम जोजफ की खंडपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 में दी गई असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपनी स्पेशल पावर का प्रयोग करते हुए यूपी में माध्यमिक शिक्षा (Uttar Pradesh Secondary Eduction Depertment) में 2000 के बाद मैनेजमेंट कोटे से नियुक्त सभी शिक्षकों की भर्ती रद्द कर दी है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 2000 के बाद से अब तक मैनेजमेंट कोटे से नियुक्त हुए सभी शिक्षकों की नियुक्ति रद्द कर दी है। देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) को मिली स्पेशल पावर एक संवैधानिक शक्ति है, जिसे निरस्त नहीं किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने तदर्थ शिक्षकों के बाद में खाली होने वाले पदों पर शीघ्र ही परीक्षा आयोजित कर उन्हें भरने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने छात्रहित में कहा कि शिक्षकों की संख्या प्राप्त संख्या में रहे, इसके लिए आवश्यक है जुलाई 2021 से पहले हर हाल में खाली पदों पर भर्ती कर ली जाए।
अब खुशी और गम में कट रही रातें
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का आदेश आते ही अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों (Uttar Pradesh Secondary Eduction Depertment) में तैनात हजारों शिक्षकों के दिन-रात बहुत ही मुश्किल से कट रहे हैं। उन्हें पता है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला अब तकदीर की नई इबारत लिखेगा। भर्ती रद्द करने का आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने परीक्षा कराए जाने का आदेश दिया है। इस तरह से अब उन्हें नए सिरे से परीक्षा देनी होगी। इस परीक्षा में सफल होने वाले शिक्षक की नौकरी पूरी तरह से पक्की हो जाएगी और परीक्षा में असफल रहने वाले अभ्यर्थी पूरी तरह से बाहर हो जाएंगे।हालांकि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के इस आदेश के बाद वर्षों से स्कूलों (Uttar Pradesh Secondary School) में पढ़ा रहे तदर्थ शिक्षक पक्का हो जाएंगे। उन्हें फिर कोर्ट के किसी आदेश का डर नहीं रहेगा। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की तरफ से जारी आदेश के अनुसार अब इन शिक्षकों को पक्का होने के लिए परीक्षा देनी होगी। कोर्ट (Supreme Court) ने इस कोटे से नौकरी पाए शिक्षकों को राहत देने का विकल्प उत्तर प्रदेश सरकार को दिया जाएगा। अब पहले से नियुक्त हुए लोगों की उम्र और मेरिट में उत्तर प्रदेश सरकार छूट दे सकती है। शिक्षकों के हित में एक खास बात यह रहेगी कि जब तक भर्ती (Management Quota) नहीं पूरी हो जाती तब तक उन्हें पूरा वेतन दिया जाएगा।
प्रबधतंत्र पूरी तरह से हो जाएगा कमजोर
उत्तर प्रदेश के जूनियर स्कूलों की तरह से ही माध्यमिक स्कूलों (Uttar Pradesh Secondary School) में कभी प्रबंधतंत्र (Management Quota) का ही बोलबाला होता था। यूपी के हजारों स्कूलों में कमाई का यही एक जरिया था। विद्यालयों (Uttar Pradesh Secondary School) में शिक्षकों की भर्ती करने के जरिए लाखों रुपये की कमाई प्रबंधतंत्र (Management Quota) करता था। यही नहीं, प्रबंधतंत्र (Management Quota) ऐसे में शिक्षकों से जो चाहता था वहीं करता था। प्रबंधतंत्र (Management ) जहां एक तरफ विद्यालय (Uttar Pradesh Secondary School) में शिक्षकों की कमी को बताकर विद्यार्थियों को शिक्षक उपलब्ध कराते थे तो वहीं कमाई भी करते थे। विद्यालय (Uttar Pradesh Secondary School) में शिक्षकों की कमी की पूर्ति तदर्थ शिक्षक के रूप में की जाती थी।अभी तक स्कूलों (Uttar Pradesh Secondary School) की यह प्रक्रिया रही है कि भर्ती के नाम पर प्रबंधतंत्र पहले उनसे पहले उगाही भी होती है। इसके बाद फिर पूरी प्रबंध कमेटी से सहमति के लिए पापड़ बेलने पड़ते हैं। इसके बाद भी नौकरी पक्की नहीं होती है तदर्श शिक्षक को कोर्ट (Supreme Court) के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं। तब कहीं जाकर उन्हें नियुक्ति मिलती है। वहीं, प्रबंधतंत्र के विद्यालयो (Uttar Pradesh Secondary School) से एक शिकायत हमेशा यह भी रही है कि मैनेजमेंट कोटे (Management Quota) से स्कूलों (Uttar Pradesh Secondary Eduction Depertment) में होने वाली भर्तियों में जमकर धांधली हुआ करती थी।
प्रबंधतंत्र (Management Quota) की तरफ से भर्ती किए जाने से प्रतिभाओं को नौकरी का अवसर नहीं मिल पा रहा था। वहीं, प्रबंधतंत्र (Management Quota) अपने रिश्तेदारों की विद्यालयों में भर्ती कर ले रहा था। अब ऐसे शिक्षकों और प्रबंधतंत्र (Management Quota) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के इस आदेश से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जुलाई 2021 तक पदों को भरने के आदेश जारी किए गए हैं। इसमें तदर्थ शिक्षकों को भर्ती (Uttar Pradesh Secondary Eduction Depertment) में वरीयता मिलेगी। यदि सफल हुए तो उनकी पुरानी सेवा को भी जोड़ा जाएगा।

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