नई दिल्ली: यूं तो आरक्षण पर खूब बहस छिड़ती है लेकिन हाल में अनुसूचित जाति के आरक्षण में वर्गीकरण के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राजनीतिक दलों में चुप्पी है। किसी को यह रास आया, किसी को नहीं भाया लेकिन किसी ने भी जुबान नहीं खोली। मामला अब सात जजों की पीठ के समक्ष है और उसका फैसला अहम होगा। हालांकि इसे
लेकर रायशुमारी का दौर बीते छह-सात साल से चल रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र जैसे कुछ अतिसंवेदनशील राज्यों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर ने अपनी राय भी दे दी है। यह और बात है कि खुलकर समर्थन करने वाले राज्यों की संख्या कम है, विरोध या चुप्पी साधने वालों की ज्यादा है।

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