Wednesday, 16 September 2020

शिक्षक-कर्मचारी सरकारी नौकरी की शुरुआत में पांच वर्षीय संविदा प्रस्ताव से नाराज, आंदोलन की चेतावनी


कर्मचारी शिक्षक अधिकारी एवं पेंशनर्स अधिकार मंच ने सरकारी नौकरी की शुरुआत में पांच वर्ष की संविदा के प्रस्ताव पर आक्रोश जताया। वीडियो कान्फ्रेसिंग में कहा कि सरकार निरंतर ऐसे कदम उठा रही जिससे शिक्षक- कर्मचारी वर्ग को आर्थिक और मानसिक पीड़ा का समाना करना पड़ रहा। मंच की ओर से मंगलवार को जारी
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बयान में कहा गया है कि कर्मचारी, शिक्षक और समाज को नाकारा घोषित कर सरकार कर्मचारी शिक्षक संवर्ग की सामाजिक प्रतिष्ठा से भी खिलवाड़ कर रही है। ऊर्जा सहित कई विभागों को निजीकरण की ओर ले जाने के लिए सरकार के इस तरह के दंडनात्मक कदम उठा रही है। कर्मचारी-शिक्षक नेताओं ने सरकार के मनमाने रवेये के खिलाफ अक्तूबर में विधानसभा घेराव से लेकर प्रदेश व्यापी आन्दोलन का निर्णय लिया है। वीडियो कान्फ्रेसिंग के दौरान सुशील त्रिपाठी, इं. हरिकिशोर तिवारी,डा. दिनेशचन्द्रशर्मा, यादवेन्द्रमिश्रा, सतीश कुमारपाण्डेय ने महत्वपूर्ण सुझाव रखें। मंच के नेताओं ने कहा कि सरकारी नौकरी की शुरुआत में पांच वर्ष की संविदा के प्रस्ताव बेरोजगारों में डर और उत्पीड़न जैसे प्रभाव रोजगार मिलने से पहले उत्पन्न हो गए हैं। सरकार के इस प्रस्ताव को युवा और कर्मचारी विरोधी करार देते हुए मंच के नेताओं ने सरकार को 2022 के चुनाव याद दिलाया है। आंदोलन की चेतावनी भी दी।

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