Saturday, 22 August 2020

निजी हाथों में होंगी पुलिस की दो दर्ज़न सेवाएं, इन्हें आउटसोर्स करने पर हो रहा है विचार


पुलिस की दो दर्जन से अधिक सेवाओं को निजी हाथों में सौंपने पर मंथन जारी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बार फिर इस मामले में सभी राज्यों के गृह विभाग व डीजीपी से तर्क के साथ सुझाव मांगा है, ताकि इस दिशा में ठोस निर्णय लिया जा सके। इसका मूल उद्देश्य है कि कोर पुलिसिंग की दिशा में पुलिस के जो मूल कर्तव्य हैं, उसे छोड़कर शेष दायित्व का निर्वहन आउटसोर्स के माध्यम से कराया जा सके। इससे पुलिस पीपुल्स फ्रेंडली बनेगी और पुलिस को कोर पुलिसिंग के अलावा अन्य कार्यों से मुक्त किया जा सकेगा। इससे पुलिस अपना सौ फीसद अपने मूल कार्य में दे सकेगी। पुलिस सुधार को लेकर पिछले कई दशक से ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) की बैठकें होती रही हैं। इन्हीं बैठकों में आउटसोर्स पर भी एक प्लान बना है। पुलिस आधुनिकीकरण के लिए केंद्र ने इस तरह की दो दर्जन से अधिक ऐसी सेवाओं का चयन किया है, जिसे पूर्ण या आंशिक रूप से निजी हाथों में सौंपने की योजना बन रही है।

इन्हें आउटसोर्स करने पर हो रहा है विचार


डाक पहुंचाना, रिकॉर्ड की देखरेख, समन तामिला, पासपोर्ट का सत्यापन, सीसीटीवी कंट्रोल रूम, पुलिस चालक, धोबी, नाई, रसोइया, स्कूल-कॉलेज की सुरक्षा, परीक्षा केंद्र की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था सुधारने के कार्य से भी पुलिस को मुक्त करने पर हो रहा है विचार।


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