बेसिक स्कूलों में डमी शिक्षकों की धरपकड़ के लिए विभाग ने आईकार्ड के प्रयोग का फैसला किया था। पिछले वर्ष दिसंबर में बजट भी जारी हो गया। कई रिमाइंडरके बाद भी नगर क्षेत्र और पांच ब्लॉक के शिक्षकों ने अपनी डिटेल अभी तक नहीं दी है। आईकार्ड नहीं बन पाए। आईकार्ड तैयार करवाने के लिए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से शिक्षकों का ब्यौरा मांगा गया था। इसमें नाम, पिता या पति का नाम, स्कूल, ब्लॉक, पोस्ट, एम्पलाई आईडी, परमानेंट ऐड्रेस और कांटेक्ट नंबर भर कर देना था। प्रति आईकार्ड 50 रुपये के हिसाब से बजट भी जारी हो गया था। कई रिमाइंडर के बाद भी अभी 15 में से 10 ब्लॉक की ही डिटेल आई है। नगर क्षेत्र की भी डिटेल नहीं आई है। इस कारण आई कार्ड तैयार नहीं हो पा रहा है। ऐसा लग रहा जैसे शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग नहीं चाहता है कि आईकार्ड बनाये जाएं। इसी लिए वो न तो अपनी जानकारी दे रहे हैं और न दूसरों को देने दे रहे हैं।
बरेली में पकड़े जा चुके हैं डमी टीचर
बेसिक स्कूलों में बड़ी संख्या में डमी शिक्षक पढ़ाते हैं। बहुत से शिक्षक ऐसे हैं जो खुद स्कूल नहीं जाते हैं। अपनी जगह उन्होंने दो-चार हजार रुपये देकर पढ़ाने के लिए शिक्षक हुए हैं। इनमें कई कद्दावर छात्र नेता भी शामिल हैं, जो अब शिक्षक बन चुके हैं। एक-दो बार उमी टीचर पकड़े भी गए, मगर दबाव के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई।स्कूलों में भी नहीं लिखे गए शिक्षकों के नाम
डमी टीचर रोकने के लिए स्कूलों में दीवार पर स्टाफ का नाम और पदनाम लिखवाने का आदेश हुआ। सभी जगह इस पर भी अमल नहीं हुआ. पिछले दिनों बीएसए ने ही कुछ स्कूलों में यह लापरवाही पकड़ी थी.सभी ब्लॉक से अभी नहीं आई है सूचनाएं
बीएसए विनय कुमार ने बताया कि अभी सभी ब्लॉक से आईकार्ड बनवाने के लिये वांछित सूचनाएं नहीं आई हैं | खण्ड शिक्षा अधिकारियों को फिर से पत्र जारी किया गया है। कुछ शिक्षक जानबूझकर देरी कर रहे हैं। लगता है कि उनकी मंशा डमी शिक्षकों को रोकने की नहीं है। जल्द ही सभी का ब्यौरा मंगवा कर आई कार्ड बनवा दिए जाएंगे।आईकार्ड होता तो नहीं पड़ता पुलिस का डंडा
शिक्षक संघ के प्रांतीय संगठन मंत्री हरीश बाबू शर्मा ने कहा कि कोरोना आपदा के समय आई कार्ड की बहुत जरूरत महसूस हो रही है। प्रशासन का कहना है कि कर्मचारी कंटेंटमेंटन जोन से अपना आई कार्ड दिखाकर सेवा स्थल पर जा सकते हैं। हम लोगों के पास आईकार्ड ही नहीं है। यदि आई कार्ड होता तो शिक्षकों को पुलिस का डंडा नहीं खाना पड़ता।

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