Sunday, 5 July 2020

एसटीएफ को आशंका, 20% शिक्षक फर्जी दस्तावेजों पर कर रहे हैं नौकरी


 लखनऊ: बेसिक शिक्षा विभाग में दो चार हजार नहीं बल्कि करीव 80 हजार से लेकर एक लाख शिक्षक तक फर्जी निकल सकते हैं। ऐसी आशंका एसटीएफ के अधिकार जता रहे हैं कि कुल शिक्षकों का 20% शिक्षक फर्जी दस्तावेजों पर ही नौकरी कर रहे हैं। एसटीएफ ने पड़ताल के लिए बेसिक शिक्षा विभाग से उनकी वेबसाइट का लिंक व अन्य जानकारियां मांगी है। दरअसल दो साल पहले मथुरा में फर्जी शिक्षकों की भर्ती का मामला सामने आने के बाद एसटीएफ ने बड़े पैमाने पर शिक्षकों की जांच की थी। एसटीएफ सिर्फ अपनी जांच में 300 से ज्यादा फर्जी शिक्षकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवा चुकी है। एसटीएफ की तरफ से दो साल पहले ही शासन को एक रिपोर्ट भेजी गई थी। इसमें सिफारिश की गई थी कि शिक्षकों के पैन कार्ड के जरिए जांच करवाई जाए इस रिपोर्ट में ही एसटीएफ की तरफ से आशंका जताई गई थी कि प्रदेश में करीब वीस फीसदी शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाई है। एसटीएफ की दो साल पहले की रिपोर्ट को माने तो प्रदेश के करीब एक लाख शिक्षक जांच के दायरे में आ रहे हैं। दो साल पहले जव एसटीएफ ने फर्जी दस्तावेज के जरिए नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों पर शिकंजा कसना शुरू किया था तो तमाम शिक्षकों ने अपने पैन कार्ड और दस्तावेजों को बदलना शुरू कर दिया था। जब शिक्षकों का डेटा मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा ऐप पर अपलोड किया जाने लगा तो यह गड़बड़ी पकड़ में आई।

एसटीएफ के अधिकारियों की मानें तो इस जालसाजी में फर्जी शिक्षकों के साथ शिक्षा विभाग के अधिकारी और वावू भी बड़े पैमाने पर शामिल हो सकते हैं। मथुरा में भी जब एसटीएफ ने वहां के तत्कालीन वीएसए पर शिकंजा कसना शुरू किया था तो एसटीएफ पर बड़े पैमाने से दबाव बनाया गया था। बाद में वीसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई भी नहीं हुई थी।

चार लाख से ज्यादा शिक्षकों के दस्तावेजों की होनी है
जांच हालांकि एसटीएफ के लिए चार लाख शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कर पाना मुश्किल होगा। एसटीएफ ने फिलहाल बेसिक शिक्षा विभाग से उनकी वेबसाइट का लिंक मांगा है।


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