Sunday, 7 June 2020

69000 सहायक अध्यापक भर्ती: दिव्यांगजनों ने लगाया अनदेखी का आरोप


69 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया में दिव्यांगजनों ने अपनी अनदेखी के आरोप लगाए हैं। दिव्यांगजनों ने शनिवार को बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय के बाहर पहुंचकर अपनी मांगें उठाई। दिव्यांगों का दावा है कि जिला आवंटन सूची में उनके लिए निर्धारित विशेष आरक्षण के प्रावधानों की अनदेखी कर वंचित वर्ग को मुख्य धारा में शामिल होने से रोकने का प्रयास किया गया है।

गिरिजा शंकर यादव, शशांक शुक्ल, विजय कुमार, अशोक तिवारी, अजय मिश्रा, मनोज कुमार, अरविंद पटेल, रूमी त्रिपाठी, उपेंद्र शुक्ला, मनीष कुमार और अमरकांत आदि का कहना है कि प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण की अधिसूचना 2018 में जारी की थी लेकिन इस भर्ती में केवल 3 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया गया है।

उच्च गुणांक वाले दिव्यांग अभ्यर्थी जिन्होंने सामान्य श्रेणी में चयनित अभ्यर्थियों के समतुल्य या उनसे अधिक गुणांक पाया है उन्हें भी दिव्यांग श्रेणी में ही चयनित माना गया है। दिव्यांगजनों के लिए विशेष आरक्षण के संदर्भ में यह प्रावधान है कि पिछली भर्ती में यदि निर्धारित संख्या के अनुरूप उपयुक्त अभ्यर्थी नहीं मिलते या सीटें रिक्त रह जाती हैं तो उन्हे आगामी भर्ती में समायोजित किया जाता है।

पिछली भर्ती यानी 68,500 सहायक अध्यापकों की भर्ती के दिव्यांगजनों के रिक्त रहे पदों का समायोजन इस भर्ती में नहीं किया गया है। दिव्यांगजनों के लिए यह भी प्रावधान है कि यदि किसी एक संवर्ग (दृष्टि बाधित/श्रवण बाधित/चलन बाधित आदि) में दिव्यांग अभ्यर्थियों की संख्या आवंटित सीट से कम है तो उसका हस्तांतरण अन्य संवर्ग में किया जाता है। इस प्रावधान का पालन भी इस भर्ती प्रक्रिया में नहीं किया गया है।

पीड़ित दिव्यांगजनों का कहना है कि जब से परिणाम घोषित हुआ है वे अधिकारों के उल्लंघन के कारण मानसिक पीड़ा और अवसाद की स्थिति में हैं।

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