69000 शिक्षक भर्ती मामला: जानिए हाईकोर्ट का फैसला शिक्षामित्रों के लिए कैसे है बड़ा झटका
लखनऊ. पिछले एक साल से कोर्ट के फेरे में फंसी योगी सरकार की 69 हजार शिक्षकों की भर्ती (UP Assistant Teacher Recruitment) परीक्षा में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ बेंच ने सरकार को तो बड़ी राहत दी, लेकिन यह शिक्षामित्रों (Shikshamitras) के लिए किसी झटके से कम नहीं है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा सहायक अध्यापक पद पर समायोजन रद्द किए जाने के बाद शिक्षामित्रों को शिक्षक भर्ती परीक्षा में वेटेज देने का भी निर्देश दिया था. लिहाजा योगी सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद शिक्षामित्रों में सहायक अध्यापक बनने की उम्मीद जगी थी. लेकिन सरकार ने 65 (सामान्य वर्ग) और 60 फ़ीसदी (आरक्षित वर्ग) कट ऑफ मार्क्स का क्लॉज़ लगाकर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. जिसके बाद शिक्षामित्र हाईकोर्ट पहुंचे. लेकिन जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल और जस्टिस करुणेश सिंह पवार ने योगी सरकार की को सही मानते हुए योग्यता और गुणवत्ता के आधार पर ही नियुक्ति का फैसला सुनाया.
शिक्षामित्रों का कहना है कि सरकार को परीक्षा के पहले ही कटऑफ को जारी करना चाहिए थे. ताकि वे उसी के अनुरूप तैयारी करते. लिखित परीक्षा के बाद उत्तीर्ण प्रतिशत तय होने से अधिकांश शिक्षामित्र भर्ती से बाहर हो जाएंगे. इस पर सरकार को फिर से विचार करना चाहिए. उनका कहना है कि अगर कटऑफ हटा दिया जाए तो शिक्षामित्रों का चयन आसानी से हो जाएगा.
इस लड़ाई को कोर्ट में लड़ने वाले अभ्यर्थी शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि यह हमारे लिए बहुत बड़ी जीत है. अब यह कोशिश होगी कि कोई इस आदेश को उच्च अदालतों में चुनौती ना दें ताकि इस भर्ती प्रक्रिया फिर से न लटके.
शिक्षामित्रों के हाथ से फिसले दो मौके
बता दें हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षामित्रों के हाथ से दो अब्दे मौके निकल गए हैं. 2017 व 2018 की टीईटी में शिक्षामित्रों से अलग से सूचना ली गई थी क्योंकि उसी के आधार पर उन्हें भर्ती में वेटेज दिया जाना था. 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने बगैर टीईटी सहायक अध्यापक पद पर 1,37,517 शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त करते हुए प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि दो भर्तियों में इन्हें अनुभव का लाभ देकर अवसर दिया जाए. उसके छह महीने बाद 17 जनवरी 2018 को सरकार ने 68500 शिक्षकों की भर्ती के लिए पहली बार सहायक अध्यापक की लिखित परीक्षा का आदेश जारी किया.
27 मई को आयोजित लिखित परीक्षा में तकरीबन 7200 शिक्षामित्र पास हुए थे. जिन्हें 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में मौका मिला. उसके बाद 6 जनवरी 2019 को 69000 शिक्षक भर्ती के लिए परीक्षा कराई गई लेकिन कटऑफ अंक को लेकर विवाद हो गया और परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय 11 महीने में अंतिम उत्तरकुंजी जारी नहीं कर सका है. इस तरह से शिक्षामित्रों के हाथों से दो मौके तो चले गए लेकिन नौकरी तकरीबन सात हजार शिक्षामित्रों को ही मिल सकी है.

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