साथियों नमस्कार.....
आज कोर्ट नंबर 1 में हमारी स्पेशल अपील 174/2019 पर सुनवाई होनी थी।
परन्तु किसी कारणवश आज कोर्ट नंबर 1 की सभी सुनवाई कोर्ट नंबर 3 में ट्रांसफर कर दी गयी।
लगभग 11 बजे अपने केस का नंबर आया, और आधे घण्टे जोरदार बहस हुई।
जिस पर विपक्षी वकील उपेन्द्र नाथ मिश्रा मौजूद रहे,
और हमारी तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विद्या भूषण पांडेय जी मौजूद रहे और साथ ही 173/2019 पर बहस के लिए भी अधिवक्ता मौजूत थे।
जैसे ही जज साहब ने हमारी अपील पर अधिवक्ता को बोलने के लिए कहा तो विपक्षी मिश्रा जी
बोलने लगे...
कि इंटरविनर जब सिंगल बेंच में allow ही नही थे तो उनको यह सुनना ही नही चाहिए।
इनका कोई राइट नही बनता, इनकी अपील का कोई मतलब नही है।
सिंगल बेंच के आये हुए आर्डर में ये उत्तीर्ण हो रहे है, ये बेवजह अपील फ़ाइल किये है।
तब जज साहब ने हमारे अधिवक्ता से बोला कि आप बोलिये आपने क्या फ़ाइल किया है और क्यों ???
तब हमारे अधिवक्ता और 173/2019 के अधिवक्ता बोले कि इंटरविनर के माध्यम से हम सिंगल बेंच में भी थे,
और यहां भी अपील के माध्यम से उपस्थित हुए है
क्योंकि
सर सिंगल बेंच के आये हुए आर्डर से हमारे अप्लिकेन्ट का हित प्रभावित हो रहा है।
क्योंकि सर 40/45 कटऑफ पर हमारे अप्लिकेन्ट इस भर्ती प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर हो जा रहे है क्योंकि
इनको 25 अंको का भारांक दिया जा रहा है स्टेट की तरफ से।
और हमारे अप्लिकेन्ट का सुपरटेट में मार्क्स भी अच्छे है फिर भी शिक्षामित्रों के भारांक की वजह से 40/45 कटऑफ के कारण बाहर हो रहे है।
इसलिए हमको प्रमुखता से सुना जाए।
मिश्रा जी फिर वही राग अलाप रहे थे कि शिक्षामित्रों को सुप्रीम कोर्ट ने ही 2 मौके दिए थे और ये इनका लास्ट मौका है।
और पहले मौके पर कटऑफ 40/45 था इसलिए दूसरे मौके पर भी 40/45 कटऑफ होना चाहिए था लेकिन सरकार ने जानबूझकर कटऑफ 60/65 कर दिया,
और हमने सिंगल बेंच में अपील किया जिसमें हम जीत कर आये है और 40/45 ही मान्य हुआ है।
जज साहब ध्यान से सारी बात सुनते रहे और फिर हमारी सहित सभी स्पेशल अपील को सुनने के लिए allow कर दिया।
शायद 14 मई की डेट में ही सारे केस टैग कर दिए गए है।
बीच बीच पर उपेन्द्र नाथ मिश्र जी बीएड के नाम पर मजा लेते रहे कि ये तो एलिजबल ही नही है, पता नही ये क्यों आये है।
शेष आर्डर आने पर ........


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