यूपी बोर्ड ने परिणाम की तारीख तय करने में भले ही वक्त लगाया, लेकिन रिजल्ट देने का नया रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। हाईस्कूल व इंटर का रिजल्ट पहली बार एक साथ 27 अप्रैल को घोषित होने जा रहा है। पिछले वर्ष को छोड़कर परिणाम मई व जून माह में ही आता रहा है। अगले वर्ष से परीक्षा कराने और रिजल्ट देने में और कम समय लगेगा, बल्कि यूं कहें कि अगले वर्ष से शैक्षिक सत्र के साथ यूपी बोर्ड कदमताल करेगा।
यूपी बोर्ड में इधर के वर्षो में नवप्रयोगों की भरमार रही है। ज्यादातर बदलाव छात्र-छात्रओं व अभिभावकों की सहूलियत को ध्यान में रखकर किए गए हैं। इधर के नौ वर्षो 2010 से लेकर अब तक हाईस्कूल व इंटर का रिजल्ट आमतौर पर मई या फिर जून माह में ही आता रहा है। इससे खासकर इंटर उत्तीर्ण करने वाले परीक्षार्थियों को उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए परेशानी होती थी। इसे देखते हुए बोर्ड ने पहले परीक्षा की समय सारिणी में बदलाव किया और उसी के सापेक्ष रिजल्ट देने का समय भी निरंतर घटाया। 2014 तक परीक्षाएं मार्च माह में शुरू होती थी, इससे रिजल्ट जून माह में आते रहे। 2015 में फरवरी में परीक्षा शुरू कराई और पहली बार हाईस्कूल व इंटर का रिजल्ट मई माह में आया। उसी साल पहली बार दोनों रिजल्ट एक साथ आया। उसके बाद से लगातार फरवरी में ही परीक्षाएं कराई गईं और रिजल्ट मई में आए। सिर्फ 2017 में विधानसभा चुनाव की वजह से बोर्ड को फिर मार्च में परीक्षा करानी पड़ी जिससे रिजल्ट जून में जारी हुआ।
2018 में परीक्षा छह फरवरी से लेकर 12 मार्च तक चलीं और रिजल्ट 29 अप्रैल को आया। इस वर्ष परीक्षा सात फरवरी से शुरू होकर दो मार्च तक चलीं और रिजल्ट 27 अप्रैल को आने जा रहा है। परीक्षा इसलिए लंबी खिंची क्योंकि प्रयागराज कुंभ के विशेष स्नान पर इम्तिहान नहीं हुआ। मूल्यांकन में देरी होली के अवकाश के कारण हुई। अगले वर्ष से परीक्षा और परिणाम में बड़ा बदलाव दिखना तय है।
रिजल्ट प्रतिशत भी बेहतर रहने के आसार
लोकसभा चुनाव के ऐन मौके पर जारी हो रहे हाईस्कूल व इंटर का रिजल्ट प्रतिशत इस बार भी बेहतर रहने की उम्मीद है। पिछले वर्ष परीक्षा में विशेष सख्ती के बाद रिजल्ट प्रतिशत को लेकर खूब कयास लगे लेकिन, बोर्ड प्रशासन ने ऐसा परिणाम जारी किया कि परीक्षार्थी खुश हो गए और परीक्षक हैरान थे। वह परंपरा इस वर्ष जारी रहने की उम्मीद है। परिणाम पिछले वर्ष की तरह की होने की उम्मीद है।
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