Monday, 1 April 2019

1188/2019 कोर्ट ऑर्डर के संदर्भ में एक शिक्षामित्र की कलम से: प्राइम टाइम पोस्ट


प्राइम टाइम पोस्ट

(1188/2019 कोर्ट ऑर्डर के संदर्भ में)

     जस्टिस राजेश चौहान जी का फैसला पूरा पढ़ चुका हूं, इतना अकाट्य है जितना सूरज का पूरब से निकलना तय है।उस न्याय के देवता को में सलाम करता हूं एक भी पॉइंट मिस्स नही किया, सब समेट दिया 148 पन्नो के भीमसेनी आदेश में...

 ज0 राजेश जी ने फैसला देने में सुप्रीम कोर्ट से आये 53 अलग अलग  केसों को नज़ीर बनाकर फैसला दिया है जिसमे आनद कुमार यादव vs स्टेट ऑफ यूपी प्रमुख है जिसका  इस्तेमाल कोर्ट ने 31 जगह  पर  किया है।कुल मिलाकर राजेश जी की बेंच ने एक ऐसा हाहाकारी ऑर्डर पेश किया है जिसकी काट किसी भी कोर्ट में होना असम्भव की हद तक होगा। कोई कोर्ट या जज अब इसे काटते हुए भी हज़ार बार सोचेगा

    बीएड भी लपेटे में है बस उनके खिलाफ प्रेयर नही थी वरना उनका भी अंतिम संस्कार कर ही दिया था कोर्ट ने, फिर भी इतना लिख दिया ह कोर्ट ने कि यदि अब कोई चाहे तो 1188/2019 को नज़ीर बनाकर बीएड को 69000 शिक्षक भर्ती से बाहर करवा सकता है क्योंकि कोर्ट ने लिखा ह की ये भर्ती सहायक अध्यापक की ह न कि ट्रेनी टीचर की और बेसिक शिक्षा नियमावली में ट्रेनी टीचर नाम की कोई पोस्ट नही ह साथ ही कोर्ट ने बेसिक में जितने भी प्रकार के शिक्षक हैं उन सबको डिफाइन किया है इसलिए अब 69000 भर्ती में बीएड की राह कांटो भरी होने जा रही है

     60/65% पा0 मा0 पर कोर्ट ने कहा है कि चुकी नियमावली में न्यूनतम पा0 मा0 का ज़िक्र है और प्रथम श्रेणी पा0 मा0 को किसी भी हाल में न्यूनतम नही माना जा सकता इसलिए 7 जनवरी के पत्र अवैध है इसलिए नियामक को ये आदेश दिया जाता ह की वो 7 जनवरी के पत्र को अवैध मानते हुए इग्नोर करते हुए 68500 भर्ती के मानकों पर 69000 भर्ती का रिजल्ट जारी करते हुए 3 माह में भर्ती प्रकिर्या पूरी करे।

     _कोर्ट ने ऑपरेटिव पार्ट में इन्द्रसेन दास vs स्टेट ऑफ आसाम 2011, यूनियन ऑफ इंडिया vs एंड स्विफ्ट 2011, राहुल दत्ता vs स्टेट ऑफ बिहार 14/02/2019 आदि आदेशो को मेंशन करके आदेश किया है जिस पर अब किसी भी विपक्षी पार्टी को राहत मिलना बेहद कठिन होगा बाकी लड़ना सबका हक़ है तो लड़ेंगे तो है ही लेकिन अब कोई बदलाव सम्भव नही होगा,धन्यवाद।


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