सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया कठिन होने के कारण डीएलएड के प्रति युवाओं में रुझान कम हो रहा है। 2011 में सरकार ने शिक्षकों की नियुक्ति के लिए टीईटी/सीटीईटी को अनिवार्य कर दिया था। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार ने 20 नवंबर 2017 को अध्यापक सेवा नियमावली 1981 में 20वां संशोधन करते हुए प्रशिक्षण, टीईटी/सीटीईटी के साथ ही लिखित परीक्षा को भी अनिवार्य कर दिया है। इतने चरण को पार करना सबके लिए आसान नहीं है। इसलिए बड़ी संख्या में बेरोजगार अब डीएलएड नहीं करना चाह रहे।.
सरकारी प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए अनिवार्य योग्यता डीएलएड (पूर्व में बीटीसी) का क्रेज सालभर में आधा रह गया है। 2018-19 सत्र में प्रवेश के लिए दो दिन पहले ऑनलाइन आवेदन समाप्त होने के बाद जो तस्वीर उभरकर सामने आई है उससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब बेरोजगारों में इस कोर्स को करने की पहले की तरह मारामारी नहीं रह गई है।.
2013 सत्र से लेकर अब तक इस साल सबसे कम अभ्यर्थियों ने फार्म भरा है जबकि सीटों की संख्या 2013 की तुलना में पांच गुना बढ़ गई है। इस साल डीएलएड की 2,11,550 सीटों पर प्रवेश के लिए 3,53,140 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। जबकि पिछले साल इतनी ही सीटों के लिए 7,19,429 आवेदकों ने फार्म भरे थे। ये स्थिति तब है जबकि आवेदन कम होने के कारण इस साल रजिस्ट्रेशन की तारीख बढ़ाई गई थी। डीएलएड के लिए पिछले महीने 11 मई को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हुए थे। पंजीकरण की आखिरी तारीख 23 मई तक तय थी लेकिन कम आवेदन होने पर सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी के अनुरोध पर सरकार ने 31 मई तक रजिस्ट्रेशन तिथि बढ़ा दी थी।.
प्राइवेट डीएलएड कॉलेजों की संख्या हर साल बढ़ रही है। सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती के सीमित पद होने के कारण वहां संभावनाएं कम हो सकती हैं। लेकिन प्राइवेट स्कूलों में डीएलएड प्रशिक्षित के लिए रोजगार की बहुत संभावनाएं हैं।.
रविन्द्र सिंह, निदेशक बलराम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स.
सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया कठिन होने के कारण डीएलएड के प्रति युवाओं में रुझान कम हो रहा है। 2011 में सरकार ने शिक्षकों की नियुक्ति के लिए टीईटी/सीटीईटी को अनिवार्य कर दिया था। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार ने 20 नवंबर 2017 को अध्यापक सेवा नियमावली 1981 में 20वां संशोधन करते हुए प्रशिक्षण, टीईटी/सीटीईटी के साथ ही लिखित परीक्षा को भी अनिवार्य कर दिया है। इतने चरण को पार करना सबके लिए आसान नहीं है। इसलिए बड़ी संख्या में बेरोजगार अब डीएलएड नहीं करना चाह रहे।.
प्राइवेट डीएलएड कॉलेजों की संख्या हर साल बढ़ रही है। सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती के सीमित पद होने के कारण वहां संभावनाएं कम हो सकती हैं। लेकिन प्राइवेट स्कूलों में डीएलएड प्रशिक्षित के लिए रोजगार की बहुत संभावनाएं हैं।.
रविन्द्र सिंह, निदेशक बलराम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स.

0 comments:
Post a Comment