13 जून 2017 को जारी शासनादेश के बिन्दु संख्या तीन में साफ है कि ऐसे शिक्षक जिन्हें पूर्व में अंतरजनपदीय तबादले का लाभ न मिला हो उनका तबादला किया जाएगा। लेकिन तमाम ऐसे शिक्षक हैं जिन्हें दोबारा इसका लाभ मिला है। कानपुर के कृष्ण मुरारी तिवारी की शिकायत है कि इस बार ऐसे कई शिक्षकों का ट्रांसफर हुआ है जिनका पूर्व में 2012, 2013 एवं 2016 में तबादला हो चुका है।
कृष्ण मुरारी ने 10 शिक्षकों की लिस्ट संलग्न करते हुए दावा किया है कि उन्हें दोबारा अंतर जनपदीय तबादले का लाभ दिया गया है। लिहाजा इस प्रकरण की जांच करवाने के बाद ही तैनाती दी जाए। अनियमितता के कारण तमाम पात्र शिक्षक स्थानान्तरण से वंचित रह गये हैं। इसके अलावा कई दिव्यांग एवं अति गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षकों का तबादला भी नहीं हुआ है।.
जबकि शासनादेश में उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मनचाहे जिले में भेजने की बात थी। उदाहरण के तौर पर प्राथमिक विद्यालय करदहां जौनपुर के दिव्यांग शिक्षक अजीत कुमार सिंह को ही लें। मूल रूप से वाराणसी के रहने वाले अजीत की पत्नी माया सिंह वाराणसी में ही प्राथमिक विद्यालय ईसीपुर बड़ागांव में बतौर शिक्षामित्र कार्यरत हैं।
चलन क्रिया से 75 प्रतिशत दिव्यांग अजीत ने वाराणसी तबादले के लिए आवेदन किया था लेकिन नहीं हुआ। रीढ़ की हड्डी में रॉड व प्लेट लगने के कारण वे व्हीलचेयर पर ही चल पाते हैं और दिव्यांगों के लिए खासतौर से तैयार स्कूटी से रोजाना 20 किमी अपने घर से जौनपुर स्कूल पढ़ाने जाते हैं।

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