इलाहाबाद प्रमुख संवाददाताविश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पुराने शोधार्थियों को बड़ी राहत दे दी है। अब असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में उन पीएचडी डिग्री धारकों को भी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी नेट की अनिवार्यता से छूट मिलेगी, जिन्होंने 11 जुलाई 2009 के बाद अपने विषय से जुड़े दो शोध पत्रों का प्रकाशन किया हो और सेमिनार/संगोष्ठी में अपने दो शोध पत्रों को प्रस्तुत किया हो।यूजीसी के सचिव पीके ठाकुर की ओर से इस बारे में जन सूचना जारी की गई है। असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए नेट अनिवार्य योग्यता है। पीएचडी डिग्रीधारकों को नेट से छूट मिलती है। यूजीसी का पीएचडी रेगुलेशन आने से पहले यानी 11 जुलाई 2009 से पूर्व पंजीकृत उन्हीं पीएचडी डिग्री धारकों को नेट की अनिवार्यता से छूट मिलती है, जो पीएचडी डिग्री देने के लिए बनाए गए यूजीसी रेगुलेशन की दी गई शर्तों में से पांच शर्तें पूरी करते हैं।इन पांच में पहली शर्त है कि अभ्यर्थियों को केवल नियमित (रेगुलर) पद्धति से पीएचडी की डिग्री मिली हो। दूसरी है कि उसके शोध प्रबंध का कम से कम दो बाह्य विशेषज्ञों ने मूल्यांकन किया हो। तीसरी शर्त में कहा गया है कि अभ्यर्थी का मुक्त मौखिक साक्षात्कार किया गया हो। चौथी शर्त है कि अभ्यर्थी ने अपने पीएचडी शोध कार्य से जुड़े दो शोध पत्र प्रकाशित किए हों, जिनमें से एक शोध पत्र संदर्भित पत्रिका (रेफरीड जर्नल) में प्रकाशित हुआ हो। पांचवीं शर्त है कि अभ्यर्थी ने सेमिनार/संगोष्ठी में अपने पीएचडी शोध कार्य से जुड़े दो पेपर को प्रस्तुत किया हो। चौथी और पांचवी शर्त पर स्थिति स्पष्ट करते हुए यूजीसी ने कहा है कि अगर 11 जुलाई 2009 के पूर्व पंजीकृत पीएचडी डिग्री धारक ने इन दोनों शर्तों को 11 जुलाई 2009 के बाद भी पूरा किया है तो उसे भी नेट से छूट मिलेगी। अर्थात ऐसे जिन पीएचडी डिग्री धारकों ने 11 जुलाई 2009 के बाद दो शोध पत्र प्रकाशित किए हैं या सेमिनार/संगोष्ठी में दो शोध पत्र को प्रस्तुत किया है तो उन्हें भी अब असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में नेट की अनिवार्यता से छूट मिल सकेगी। यूजीसी ने कहा है कि ऐसे अभ्यर्थियों को उस विश्वविद्यालय से सर्टिफिकेट प्राप्त करना होगा, जहां से उन्होंने पीएचडी डिग्री प्राप्त की है। जानकारों का कहना है कि शोधार्थियों के एक बड़े वर्ग को इसका लाभ मिलेगा और वे अब नेट अनिवार्यता से मिली छूट का लाभ उठाते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में दावेदारी कर सकेंगे।
Tuesday, 12 December 2017
शिक्षक भर्ती में यूजीसी ने पुराने शोधार्थियों को दी बड़ी राहत
इलाहाबाद प्रमुख संवाददाताविश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पुराने शोधार्थियों को बड़ी राहत दे दी है। अब असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में उन पीएचडी डिग्री धारकों को भी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी नेट की अनिवार्यता से छूट मिलेगी, जिन्होंने 11 जुलाई 2009 के बाद अपने विषय से जुड़े दो शोध पत्रों का प्रकाशन किया हो और सेमिनार/संगोष्ठी में अपने दो शोध पत्रों को प्रस्तुत किया हो।यूजीसी के सचिव पीके ठाकुर की ओर से इस बारे में जन सूचना जारी की गई है। असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए नेट अनिवार्य योग्यता है। पीएचडी डिग्रीधारकों को नेट से छूट मिलती है। यूजीसी का पीएचडी रेगुलेशन आने से पहले यानी 11 जुलाई 2009 से पूर्व पंजीकृत उन्हीं पीएचडी डिग्री धारकों को नेट की अनिवार्यता से छूट मिलती है, जो पीएचडी डिग्री देने के लिए बनाए गए यूजीसी रेगुलेशन की दी गई शर्तों में से पांच शर्तें पूरी करते हैं।इन पांच में पहली शर्त है कि अभ्यर्थियों को केवल नियमित (रेगुलर) पद्धति से पीएचडी की डिग्री मिली हो। दूसरी है कि उसके शोध प्रबंध का कम से कम दो बाह्य विशेषज्ञों ने मूल्यांकन किया हो। तीसरी शर्त में कहा गया है कि अभ्यर्थी का मुक्त मौखिक साक्षात्कार किया गया हो। चौथी शर्त है कि अभ्यर्थी ने अपने पीएचडी शोध कार्य से जुड़े दो शोध पत्र प्रकाशित किए हों, जिनमें से एक शोध पत्र संदर्भित पत्रिका (रेफरीड जर्नल) में प्रकाशित हुआ हो। पांचवीं शर्त है कि अभ्यर्थी ने सेमिनार/संगोष्ठी में अपने पीएचडी शोध कार्य से जुड़े दो पेपर को प्रस्तुत किया हो। चौथी और पांचवी शर्त पर स्थिति स्पष्ट करते हुए यूजीसी ने कहा है कि अगर 11 जुलाई 2009 के पूर्व पंजीकृत पीएचडी डिग्री धारक ने इन दोनों शर्तों को 11 जुलाई 2009 के बाद भी पूरा किया है तो उसे भी नेट से छूट मिलेगी। अर्थात ऐसे जिन पीएचडी डिग्री धारकों ने 11 जुलाई 2009 के बाद दो शोध पत्र प्रकाशित किए हैं या सेमिनार/संगोष्ठी में दो शोध पत्र को प्रस्तुत किया है तो उन्हें भी अब असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में नेट की अनिवार्यता से छूट मिल सकेगी। यूजीसी ने कहा है कि ऐसे अभ्यर्थियों को उस विश्वविद्यालय से सर्टिफिकेट प्राप्त करना होगा, जहां से उन्होंने पीएचडी डिग्री प्राप्त की है। जानकारों का कहना है कि शोधार्थियों के एक बड़े वर्ग को इसका लाभ मिलेगा और वे अब नेट अनिवार्यता से मिली छूट का लाभ उठाते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में दावेदारी कर सकेंगे।
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