इलाहाबाद विधि संवाददाता
हाईकोर्ट ने प्रदेश के अशासकीय व मान्यता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में 2008 से पहले नियुक्त अप्रशक्षित अध्यापकों को 31 मार्च 2019 के बाद हटाने के आदेश को लेकर दाखिल याचिका पर केंद्र व राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि जवाब दाखिल न करने पर सचिव स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग उपस्थित रहें।यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले एवं न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षक संघ की जनहित याचिका पर दिया है । केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को 31 मार्च 2019 के बाद अप्रशक्षिति अध्यापकों को अयोग्य घोषित कर सेवा हटाने का निर्देश दिया है। याचिका में दूरस्थ शिक्षा योजना के तहत अध्यापकों को प्रशिक्षण देने की अनुमति देने की मांग की गई है। कहा गया है कि प्राइमरी टीचरों को दूरस्थ शिक्षा योजना का लाभ दिया गया है और जूनियर हाईस्कूल के अध्यापकों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

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